Main Logo

हिसार में राखीगढ़ी टीला की खोदाई में मिले तीन कंकाल, इलाके में मचा हडकंप, सरकार ने लिया ये फैसला

 | 
राखीगढ़ी के टीला पर खोदाई में मिले तीन कंकाल, इलाके में मचा हडकंप

HARYANATV24: दुनिया में हड़प्पाकालीन सभ्यता को लेकर सबसे बड़ी साइट राखीगढ़ी के टीला नंबर-एक पर इन दिनों खोदाई चल रही है। खोदाई के दौरान पांच दिन में तीन कंकाल मिले हैं। इसमें एक महिला, एक पुरुष और एक बच्चे का कंकाल है। यह एक परिवार के लग रहे हैं। तीनों को पास-पास की दफनाया गया था। कंकाल के अलावा बहुत बड़ा डिश ऑन स्टैंड (खाने की टेबल) मिली है।

वहीं साल 2016 में टीला नंबर सात पर डेकन यूनिवर्सिटी के पूर्व चांसलर प्रो. वसंत शिंदे के नेतृत्व में खोदाई के दौरान 62 कंकाल मिले थे। इनमें से एक कंकाल में डीएनए मिला था, जिसकी जांच भारत और कोरिया में हुई थी। डीएनए से साढ़े चार हजार साल पुरानी हड़प्पाकालीन संस्कृति के प्रूफ मिले थे। यह हड़प्पकालीन संस्कृति पांच हजार वर्ष पुरानी है।

राखीगढ़ी के टीला नंबर एक पर फरवरी माह में पुरातत्व विभाग दिल्ली और हरियाणा सरकार ने मिलकर खोदाई शुरू की थी। टीला नंबर एक पर करीब पांच दिन पहले टीम को तीन कंकाल मिले थे। यह एक साथ दफनाए गए हैं। टीम ने इनको बाहर निकालने के लिए सुरक्षित तरीके से खोदाई शुरू कर दी है।

टीला नंबर एक को खुला रखने की तैयारीबाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए खुशखबरी है कि राखीगढ़ी में मौजूद टीला नंबर-एक पर भी खोदाई के बाद इस साइट को पुरातत्व विभाग खुला रखने की योजना पर कार्य कर रहा है ताकि देश विदेश से आने वाले पर्यटकों को को निराश होकर ना लौटना पड़े। हालांकि टीला नंबर तीन पर पर्यटकों के लिए साइट को खुला रखा गया है। पूरी साइट पर साफ सफाई करवा दी गई है।

टीला एक पर साइट के चारों तरफ पगडंडी बना दी गई है। सोलर लाइट भी लगाई है। कुछ हिस्से पर पार्क बनाने की योजना है। बैठने के लिए कुर्सियां भी रखी जा रही हैं। व्यापारिक दृष्टि से टीला नंबर एक महत्वपूर्ण पुरातत्वविदों के अनुसार टीला नंबर-एक हड़प्पाकालीन समय का बड़ा व्यापार केंद्र होता था। इस टीले पर अलग-अलग पत्थर मिल चुके हैं। भारी मात्रा में भट्ठी मिली थी। यह भट्ठियां कच्चे सामान को पकाने के लिए प्रयोग में लाई जाती थीं।

महिलाएं शृंगार करने के लिए मनकों की मालाओं का प्रयोग करती थी। इस टीले पर कार्नीलियन, जैसपैर, अगेट, इंस्ट्रेटाइट, पेस्टबीड, टेराकोटा बीड भारी मात्रा में मिल चुके हैं। खोदाई के दौरान टीले पर बड़े डिश आन स्टैंड के अवशेष भी मिले हैं। इससे साबित होता है कि वह लोग एक साथ बैठकर टेबल पर खाना खाते थे। उसे समय टेबल लकड़ी की ना होकर मिट्टी से बनाई जाती थी, फिर उसको पकाया जाता था। सुंदरता के लिए उस पर चित्रकारी भी की जाती थी।

Around The Web

Trending News

You May Like

Recommended