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अब स्कूलों में बच्चों के साथ माता-पिता की भी लगेगी क्लास, जाने कैसे

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नेशनल कैरीकुलम फ्रेमवर्क

HARYANATV24: स्कूलों के लिए तैयार किए गए नए नेशनल कैरीकुलम फ्रेमवर्क NCF ने बच्चों के पढ़ने-पढ़ाने को लेकर एक रोडमैप तैयार किया है, जिसमें बच्चों के स्कूल में दाखिला देते समय माता-पिता और अभिभावकों की ओरिएंटेशन क्लास आयोजित की जाएगी। जहां उन्हें घरों में बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल देने सहित स्कूलों के साथ जुड़कर बच्चों के विकास पर कैसे नजर रखना है आदि से जुड़ी जानकारियां दी जाएगी।

बच्चों के समग्र विकास पर जोर

एनसीएफ के तहत यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि बच्चे स्कूल के बाद यदि कहीं सबसे ज्यादा समय रहते है, तो उनका घर, परिवार व मोहल्ला होता है। ऐसे में यदि वहां का माहौल ठीक नहीं तो स्कूल चाहकर भी उसके प्रदर्शन को बेहतर नहीं बना पाएगा।

फिलहाल इसे लेकर जिन अहम कदमों की सिफारिश की गई है, उनमें ओरिएंटेशन क्लास, पैरेंट- टीचर मीटिंग, माता- पिता के संवाद, स्कूल मैनेजमेंट कमेटी गठित करने, बाल मेला, प्रदर्शनी, स्वच्छता और स्वास्थ्य कैंप जैसी गतिविधियों को चलाने पर जोर दिया गया है।

माता-पिता की भागीदारी हो सुनिश्चित

एनसीएफ के मुताबिक अभी स्कूलों में माता-पिता या अभिभावक सिर्फ दाखिला दिलाने या बच्चों का रिजल्ट लेने के लिए ही आते है। अभिभावक यह सुनिश्चित करें कि वह नियमित रूप से स्कूल आए। बच्चों की पढ़ाई का आकलन करें और जरूरी सुझाव भी दें।

गौरतलब है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को लेकर शिक्षा मंत्रालय ने हाल ही में नेशनल कैरीकुलम फ्रेमवर्क जारी किया गया है। जिसके तहत स्कूलों के लिए कक्षा तीन से बारहवीं तक की पाठ्यपुस्तकें तैयार की जाएगी। इसके साथ ही फ्रेमवर्क के तहत प्रस्तावित की गई सभी सिफारिशें भी स्कूलों में लागू की जाएगी।

स्कूलों के लिए तैयार किए गए नए नेशनल कैरीकुलम फ्रेमवर्क NCF ने बच्चों के पढ़ने-पढ़ाने को लेकर एक रोडमैप तैयार किया है, जिसमें बच्चों के स्कूल में दाखिला देते समय माता-पिता और अभिभावकों की ओरिएंटेशन क्लास आयोजित की जाएगी। जहां उन्हें घरों में बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल देने सहित स्कूलों के साथ जुड़कर बच्चों के विकास पर कैसे नजर रखना है आदि से जुड़ी जानकारियां दी जाएगी।

बच्चों के समग्र विकास पर जोर

एनसीएफ के तहत यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि बच्चे स्कूल के बाद यदि कहीं सबसे ज्यादा समय रहते है, तो उनका घर, परिवार व मोहल्ला होता है। ऐसे में यदि वहां का माहौल ठीक नहीं तो स्कूल चाहकर भी उसके प्रदर्शन को बेहतर नहीं बना पाएगा।

फिलहाल इसे लेकर जिन अहम कदमों की सिफारिश की गई है, उनमें ओरिएंटेशन क्लास, पैरेंट- टीचर मीटिंग, माता- पिता के संवाद, स्कूल मैनेजमेंट कमेटी गठित करने, बाल मेला, प्रदर्शनी, स्वच्छता और स्वास्थ्य कैंप जैसी गतिविधियों को चलाने पर जोर दिया गया है।

माता-पिता की भागीदारी हो सुनिश्चित

एनसीएफ के मुताबिक अभी स्कूलों में माता-पिता या अभिभावक सिर्फ दाखिला दिलाने या बच्चों का रिजल्ट लेने के लिए ही आते है। अभिभावक यह सुनिश्चित करें कि वह नियमित रूप से स्कूल आए। बच्चों की पढ़ाई का आकलन करें और जरूरी सुझाव भी दें।

गौरतलब है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को लेकर शिक्षा मंत्रालय ने हाल ही में नेशनल कैरीकुलम फ्रेमवर्क जारी किया गया है। जिसके तहत स्कूलों के लिए कक्षा तीन से बारहवीं तक की पाठ्यपुस्तकें तैयार की जाएगी। इसके साथ ही फ्रेमवर्क के तहत प्रस्तावित की गई सभी सिफारिशें भी स्कूलों में लागू की जाएगी।

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